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Friday, May 29, 2020

दिल्ली और कोरोना !

पुरे भारत के साथ दिल्ली में भी पहले २२ मार्च  को जनता कर्फ्यू के था ही लॉक डाउन शुरू हुआ. लॉक डाउन 1.0, लॉक डाउन 2.0 बहुत अच्छा रहा . लॉक डाउन ३.0 में लोगों को खुजली होने लगी. सरकार जनता के बारे में नहीं सोच रही है . काम नहीं होगा तो लोग भूखे मर जायेंगे . सभी लोग सरकार पर अपना गुम्बार निकालने लगे . इस दौरान कोरोना पुरे नियन्त्र्ण में था .

पर कुछ राजनीती, कुछ लोगों को काम की चिन्ता, सरकार ने लॉक डाउन ४.0 में बहुत छुट दे दी . १७ मई को लॉक डाउन ३.0 ख़तम हुआ, लॉक डाउन ४.0 शुरू हुआ. सरकार ने कुछ छुट दे दी , दुकानें खोलने की आज्ञा दे दी , लोगों को लगा की उन्हें आजादी मिल गयी है . सभी घरों  से बाहर निकल आये . लोगों को लगा की कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा. बहुत से लोग तो मास्क लगाना भी जरुरी नहीं समझ रहे है.ऐसे में कोरोना को मौका मिल गया . जहाँ पहले 100 – १५० केस हर दिन के आ रहे थे , धीरे धीरे बढ़ते बढ़ते कल (२८मई 20) ११०० केस एक दिन के हो गए . कुल मिलकर १६२८१ कैसें २९ तारीख तक को दर्ज हुए . २७, २८ और २९ मई को संख्या 1000 प्रतिदिन  के आसपास हो गयी . ११ दिन में क़रीब ६५०० नए केस आ गए .

अचानक से इतने केस बढ़ने का कारण लोगों की भीड़ बढ़ने से हुआ . सभी पैसा कमाना चाह रहे है . लेकिन लॉक डाउन ४.0 में सब को समझ आ गया की पैसे से ज्यादा जान बचाना जरुरी है . पहले सरकार ने दो महीने सभी को अच्छी तरह से समझा दिया की घर में रहने में ही भलाई है , परन्तु जनता को समझ नहीं आ रहा था . उन्हें लग रहा था की सरकार उन्हें बेवकूफ़ बना रही है . हम घर पर रहेंगे तो काम कैसे चलेगा ?

इसलिए लॉक डाउन ४.0 में सरकार ने जनता को पूरी छुट दे दी . सुबह ७ बजे से शाम ७ बजे घुमो फिरो , कोई रोकटोक नहीं . लोग ने भी मनमर्जी शुरू कर दी . नतीज़ा ११ दिन में ६५०० नए केस . पहले प्रतिदिन २०० – २५० केस ही आते थे , अब प्रतिदिन का आकड़ा ११०० को पार कर गया .

शायद लोगो को समझ आने लगा है की कहीं कुछ ग़लत होने जा रहा है . दुकानदारों को लग रहा था की सरकार जबरदस्ती उनकी दुकानें बंद करवा रही है, लेकिन अब उन्हें समझ आ गया है की सरकार सही थी, अपने घर में रहने में ही भलाई है . अब सब अपनी मर्जी से दुकान बंद कर रहे है .

शायद अब लोगो को समझ में आ जाये की अपनी सुरक्षा कितनी जरुरी है . भारत में लोगों को सब चीजों का मजाक बनाने की आदत सी हो गयी है . उन्हें लगता है की कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा . परन्तु अब ऐसी नौबत आ गयी है की कोरोना का कोई भी चिन्ह नज़र नहीं आता और इंसान कुछ ही घंटो में चल बसता है .

सरकार के पास भी इतने साधन नहीं है की सब को हॉस्पिटल में भर्ती रख सके . अभी कोरोना का कोई भी इलाज़ नहीं है . दो दिन पहले के समाचार ने शायद सब को जरुर हिला दिया होगा . किसी हॉस्पिटल में १८० से ज्यादा लाशें अपने अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में है . श्मशान घाट पर पूरी सुविधाएँ नहीं है . मृतक का शरीर भी परिवार वालो को नहीं दिया जा रहा है . लोगों को स्तिथि शायद समझ में आ जाये . अपनी सुरक्षा सब से जरुरी है . २०२० निकल जाये . जान बची रहेगी तो २०२१ में सब करना जो इच्छा हो .

घर पर रहे, सुरक्षित रहे !

अम्बर हरियाणवी

#KILOIA