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Sunday, May 12, 2019
माँ
माँ कब से नहीं सुनी, तुम्हारी लोरी, काश! एक बार फ़िर से, तुम आ जाती वापिस। इस बेचैन जिंदगी में, कुछ मिलती राहत। तुम्हारे आँचल की छांव में, मैं बन जाता एक छोटा बच्चा।
1 comment:
वाह क्या बात है आदरणीय श्री !
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