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Sunday, May 12, 2019

माँ

माँ
कब से
नहीं सुनी,
तुम्हारी लोरी,
काश!
एक बार फ़िर से,
तुम आ जाती वापिस।
इस बेचैन जिंदगी में,
कुछ मिलती राहत।
तुम्हारे आँचल की छांव में,
मैं बन जाता एक छोटा बच्चा।

अम्बर हरियाणवी
©KILOIA

1 comment:

गोविंद सिंह पवार (नोएडा) said...

वाह क्या बात है आदरणीय श्री !