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Monday, February 4, 2019
पुस्तक लोकार्पण, सम्मान समारोह की रिपोर्ट :
नयी दिल्ली - 6 जनवरी 2019. विश्व पुस्तक मेले में मगसम के सौजन्य से दो पुस्तकों का विमोचन हुआ। पहली ऋग्वेद के रहस्य लेखिका उमा गुप्ता जी, ( सेवानिवृत जल विधुत विभाग देहरादून) तथा दूसरी तेरह साल का शहीद विधार्थी रामचंद्र लेखक भीम प्रसाद प्रजापति ( प्रधानाचार्य, राजकीय विद्यालय देवरिया ) ।
लोकार्पण और सम्मान समारोह स्टाल नम्बर ३३२, प्रगति मैदान पर हुआ।
इस अवसर पर श्रीमती विजयलक्ष्मी ‘विजया’ ( संरक्षिका, जयकृति साहित्य फाउण्डेशन ) मुकेश गोयल ‘किलोईया’,( उपाध्यक्ष, जयकृति साहित्य फाउण्डेशन) के साथ दोनों पुस्तकों के लेखक, उपस्थित थे।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विजयलक्ष्मी विजया ऊर्फ़ विजया बीकानेरी जी थीं। कार्यक्रम का संचालन हेमचन्द्र सकलानी जी ने किया।
दोनों पुस्तकों पर श्री मुकेश गोयल किलोईया, श्री कर्मेश सिन्हा, श्री विजय विभोर, श्री हेमचन्द्र सकलानी, श्रीमती गीता सिन्हा गीतांजलि एवं विजयलक्ष्मी विजया जी ने विस्तृत समीक्षात्मक चर्चा करते हुए इन दोनों ही लेखकों को बधाई दी।
भीम प्रसाद जी की पुस्तक तेरह साल का शहीद विधार्थी रामचंद्र एक ऐसी कहानी है जिसमें लेखक ने एक गुमनाम शहीद को सब के सामने लाने का प्रयास किया है . रामचंद्र सम्भवतः दुनिया के सब से छोटी उम्र के शहीद होंगे जिन्होंने देश के लिए तिरंगा फहराते हुए अपनी जान दे दी. १४ अगस्त १९४२ को देवरिया में इस नन्हे शहीद ने देश पर अपनी कुर्बानी दी।
उमा जी की पुस्तक ऋग्वेद के रहस्य ऋग्वेद की हिंदी में व्याख्या करने का प्रयास है। आज के समय में संस्कृत सभी नहीं पढ़ सकते है, किन्तु हिंदी सभी पढ़ लेते हैं। ऋग्वेद में हमारे सम्पूर्ण जीवन के बारे में बताया गया है।
देश काल के अनुसार राजा का क्या कर्तव्य है; प्रजा को क्या करना चाहिए; इसके अलावा भी बहुत सी बातें बताई गयी हैं . सभी को ये दोनों पुस्तकें अवश्य पढ़नी चाहियें और अपनों बच्चों को पढ़ने को देनी चाहियें।
कार्यक्रम में मगसम के राष्ट्रीय संयोजक श्री सुधीर सिंह ‘सुधाकर’, श्री अमरजीत गिरी, आदित्य राजुल, जयकृति राजुल, तानिया, हर्षित, रोमशा, तुणीर गोयल, उमा गुप्ता जी के परिजन, गीता सिन्हा जी के पतिश्री के साथ-साथ और भी कई साहित्यकार उपस्थित रहे।
सुधीर जी ने मगसम के उद्देश्य और कार्यों की चर्चा की . अंत में श्रीमती विजया जी ने मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए कहा कि साहित्यकारों के मध्य मतभेद भले हों परन्तु मनभेद नहीं होना चाहिये।
विजया जी ने मगसम के साथ-साथ दोनों लेखकों को भी बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
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