इंतजार !
गौरी बैठी नदी के किनारे, पिया की वो राह निहारे,
सोलह सिंगार कर के आई, बैठ पाषाण पर मंद मुस्काई।
कब आएंगे पिया मोरे, कब से बैठी बाट निहारु
आ जाओ अब तो प्रीतम, हौले हौले तुम्हे पुकारू,
काजल, बिंदी, लाली गजरा, सब से मैने सिंगार किया है,
नथनी, बाली, बिछुआ पहना, तेरे नाम का रस पिया है,
होठो पर मुस्कान सजी है, आंखों में लाली है छाई,
अब तो आ जाओ साजन, विरह में क्यो इतनी तड़पाई।
मुकेश गोयल 'किलोईया'
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