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Wednesday, May 7, 2025

ओपरेशन सिन्दूर !

 पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा मासूम हिन्दू लोगों का किया गया नरसंहार एक बार फ़िर से भारत और पाकिस्तान को आमने सामने ले आया है जिसकी वजह से भारत को एक बार फ़िर से पाकिस्तान को सबक सिखाना जरुरी हो गया था . 

पूरा भारत यही चाह रहा था की कोई सख्त कार्यवाही पाकिस्तान पर होनी चाहिए . 

ओपरेशन सिन्दूर !

 जैसे ही लोग सुबह उठे सभी तरफ एक ही चर्चा थी . रात में भारत में POK और पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर हमले करके उन्हें बर्बाद कर दिया . 

एक बार फ़िर से भारत ने दिखा दिया है कि भारत का जो कोई भी नुकसान करेगा, उस सबक जरुर सिखाया जायेगा . 

अबकी बार पाकिस्तान ने भी कहा है की भारत ने उसके 9 जगह पर हमला किया है . 

भारत की जंग दो मोर्चों पर है - एक सीमा पर और एक देश के अंदर.  

पुरे देश में हजारों पाकिस्तानी और बंगलादेशी घुसपेठिये भर गए गए है . इसकी एक वजह है भ्रष्टाचार. बहुत से लोग पैसे लेकर फर्जी आधार कार्ड और पेन कार्ड बनवा देते है और भारत में घुसाने में उन्हें मदद करते है . शायद आप लोगो  को याद हो एक बार जे एन यू में नारे लगे थे - तुम जितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा, वो सही कह रहे थे . अगर ये पहलगाम वाला आतंकी हमला न होता और मोदी जी सभी पाकिस्तानियों को भारत छोड़ने को न कहते तो हमें ये पता ही नहीं चलता की भारत की मुस्लिम लड़कियों ने शादी पाकिस्तान में की हुई है और बच्चे यहाँ पैदा करके उन्हें यहाँ मुफ्त में पाल रही है . सरकार से सभी योजनाओ का लाभ भी उठा रही है . 

अब भारत के पास मौका है की POK को पाकिस्तान से छुड़वाए और अपने सिर के ताज काश्मीर को पूर्णतय से अपने में मिलाये.

भारत को चीन की तरह से विस्तारवादी नीत्ति अपनानी होगी. बांग्लादेश और पाकिस्तान भारत का ही हिस्सा थे, अब भारत को उन्हें अपने में ही मिलाने की सोचनी चाहिए . पहले भारत एक बहुत बड़ा देश था , लेकिन धीरे धीरे टुकड़ों में बटता चला गया, अब भारत के पास एक अच्छा शासक है, हमें उनका साथ देते हुए, भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग करनी चाहिए और धर्मनिरपेक्ष शब्द जो १९७६ में सविंधान में जोड़ा गया था उसे हटा देना चाहिए. 


Wednesday, April 23, 2025

काले सायों की काली करतूत !

 धर्म तो होता है शांतिदूतों का भी,

जो करते है नफ़रत दूसरे धर्म से !


रक्षक के रूप में 

आए थे वो भक्षक,


नफ़रत थी तो सिर्फ़ हिंदुओं से,

न कोई जाति,न कोई भाषा,

न कोई जिला, न कोई प्रांत,

सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दू ,

जो बंटे है, आपस में,

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर,


क्या ठेका सिर्फ़ हिंदुस्तान का ही है?

धर्म निरपेक्ष होने का?


कब तक हम बंटेगे, 

जाति और भाषा के नाम पर?


जब तक हम बटेंगे, तब तक हम कटेंगे,

कब होंगे हम सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दू?


कब दूर होंगी हमारी जातियां?

कब होगा दुनियां में,

एक हमारा हिन्दू राष्ट्र?


भगवा या हिन्दू, 

अपने ही देश में,

नहीं अब सुरक्षित,


नहीं मानते है अब भी हम,

नहीं जागते है अब भी हम,

उठाओ हथियार, उठाओ हथियार,

लड़नी होगी एक और जंग,


लड़नी होगी अपने अस्तित्व की लड़ाई,

अपने ही देश में,

नहीं है हिंदुओं का होते हुए भी,

हिंदुओं का ये देश,


न्यायालय भी मांगता है सबूत,

धर्मनिरपेक्षता का अंधा समर्थन,

क्या बिक गया है यहां सब?


उम्मीद करे भी तो किस से?

सब कुछ तो बिक चूका है,

हिन्दू बिक चुका है स्वयं,

करता है विरोध,

अपने ही हिंदुत्व का,


लड़ता है न्याय की लड़ाई,

अपने ही दुश्मन के लिए!


क्या सुरक्षित हो तुम?

जब पूछा जाता है, तुम से तुम्हारा धर्म,

उतार दिया जाता है,माथे में गर्म लोहा,

रोते बिलखते बच्चें और औरतें,

हर तरफ़ लाशें ही लाशें,


अट्टहास करता दानव,

जिसका कोई धर्म नहीं,

क्योंकि वो तो शांतिदूत है,


मिटाता है दूसरों की शांति,

बहाता है दूसरों का रक्त,

करता है दूसरों की बहन, बेटियों को विधवा,


और हमारे धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार,

जो कहते है खुलेआम,

शांतिदूतों का तो कोई धर्म ही नहीं होता!


और वो शांति दूत,

मारते है धर्म पूछ पूछ कर,

हिन्दू धर्म के ही मानव को,

करते है नंगा, मानवता को,


जांच के लिए उतरवा लेते है,

इंसान के कपड़े भी,


मगर इन सब के बीच,

सवाल वही आ जाता है एक?

कोई तो होगा इन शांतिदूतों का मददगार,

वरना नहीं दे पाते अंजाम,

इतनी बड़ा नरसंहार,


जांच हो पूरी, हो फ़िर से एक,

सर्जिकल स्ट्राइक, 

दुश्मन को नेस्तनाबूद करने को,

दुश्मन को ख़ाक में मिलाने को,


होना होगा हम सब को एक,

भूलनी होगी अपनी जाति, अपनी भाषा,

देना होगा जवाब,

हमें जाति और भाषा में बांटने वालो को!


बनो सिर्फ़ - एक हिन्दू तुम,

राष्ट्र को भी हिंदुस्तान बनाना होगा,

एक बार फिर से होगा समर,

अपने अंदर के हिन्दू को जगाना होगा।


अम्बर हरियाणवी

©Kiloia

Wednesday, March 12, 2025

इंसान के बड़े बोल !

 पिछले दिनों हुए दिल्ली के चुनाव में भाजपा की जीत ने दिखा दिया की इंसान को बड़े बोल नहीं बोलने चाहिए. आप पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल जरुरत से ज्यादा बोल रहे थे ..कुछ उनके बोल ...

...मोदीजी को दूसरा जन्म लेना होगा दिल्ली में जीतने के लिए .

... हम दिल्ली के मालिक है .

... अगले पचास साल तक हमें कोई दिल्ली से हिला नहीं सकता .


इंसान को हमेशा जमीन की ओर देख कर चलना चाहिए . बड़े बोल बोलने से पहले दस बार सोचना चाहिए.