बहस सुनकर अदालत में वकीलों की
आत्मा भी रो पड़ी उस लड़की की,
जिसका बलात्कार कर के
मार दिया था वहशी दरिन्दे ने.
ये बिके हुए कानून के रखवाले,
पैसे के लिए बेच दे अपनी अस्मत भी.
नहीं है खून इनकी शिराओं में ,
बहता है दोगलेपन का जहर.
क्या इनकी नहीं है बहन बेटियाँ?
कोई करे जिनके साथ बलात्कार,
अहसास कराये इन्हें भी,
किसी की आबरू लुटने का.
कैसे और किस चेहरे से,
ये करते है झूठी बहस,
चंद कागज़ के टुकड़ों के लिए,
बोलते है हजारों झूठ .
समाज भी इन्हें
क्यों देता है इज्जाजत ?
क्या मर गया है
ज़मीर सभी का ?
सब से पहले दे, इन्हें ही सजा,
जो आते है बचाने,
बोलते है झूठ पर झूठ,
बदल देते है सब कुछ पैसों में.
नारी जाती का करते अपमान
ये समाज के है गद्दार.
अदालत में करते है ,
एक बार फ़िर से बलात्कार.
जागो .....
मिलकर करो विरोध ...
बलात्कारी को सजा दे तुरंत.
कानून से यही अनुरोध.
मुकेश गोयल “किलोईया”
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